बाहर से आवाज आई
जब मैंने दरवाजा खोला
तो तुम थे…
तुम्हें सामने देखकर
थोड़ी शर्म आई
मैं रुकना चाहती थी
कुछ बोलना चाहती थी
तुम्हें छूकर महसूस करना चाहती थी
पर शर्माकर वहाँ से चली आई
सोंचा था थोड़ी देर ठहरोगे
तो एक बार और कर लूंगी तुम्हारा दीदार
पर तुम रुके नहीं चले गये
अपने साथ मेरा सुकून लेकर और
हमेशा की तरह हमको दीवाना कर गये…
हमको दीवाना कर गये
Comments
11 responses to “हमको दीवाना कर गये”
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अति सुंदर , बेहद जानदार और शानदार कविता👌
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धन्यवाद
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बहुत सुंदर लाजवाब कविता
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Thanks
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Very good
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Thanks
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चाहत रेशम की डोर है।
तभी तो आज बेचैनी है।।-

Thanks amit ji
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सुन्दर
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Thanks
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अतिसुंदर
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