6 Comments

  1. सीधे खड़े अकड़े ठूॅंठ को,
    कोई ना स्वीकार करे
    बहुत सुंदर रचना 👌
    झुकता है वो ही जिंदा है
    अकड़ता जो मुर्दा है

  2. सूर्य, चन्द्र बाॅंटें निज उजाला,
    बिना किसी स्वार्थ के
    उनको देखकर हमने भी,
    निस्वार्थ सेवा करना सीख लिया है।
    —- बहुत ही उच्चस्तरीय रचना। जीवन से जुड़े भावों को लिपिबद्ध करने की बेहतरीन कला है कवि में वाह।

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