प्यारे उसी के हो लिये

बच्चों की आदत रही
खाकर भूल जाने की
फल उठा बस ले चले
चाहत मरी ठिकाने की

किसमें गलतियां ढूंढे हम
किससे अब शिकायत करें
दोष देगा जमाना दोनों को
दरार है जिसके तहखाने में

संस्कार जिन ग्रंथों में है
उसकी सफाई भूल गये
बाहर झाड़ू ललगाई अक्सर
घर के कोने मैले रह गये

समय जिन्हें देना था
उसे उससे चुराते चले गये
जिसने उसे ये धन दिया
प्यारे उसी के हो लिये

Comments

8 responses to “प्यारे उसी के हो लिये”

  1. Satish Pandey

    संस्कार जिन ग्रंथों में है
    उसकी सफाई भूल गये
    बाहर झाड़ू ललगाई अक्सर
    घर के कोने मैले रह गये
    ———- बहुत सच लिखा है आपने। आज संस्कार भूलते चले जा रहे हैं लोग।

    1. Rajeev Ranjan Avatar
      Rajeev Ranjan

      Dhanyabad Satish ji . Dhyan se dekhe to aapki hi rachna ka jawab hai.

  2. Geeta kumari

    समय जिन्हें देना था
    उसे उससे चुराते चले गये
    जिसने उसे ये धन दिया
    प्यारे उसी के हो लिये
    ___________ समय अभाव के कारण टूटते , बिखरते रिश्तों की सच्ची दास्तान, बयान करते हुए बहुत उम्दा रचना, सुंदर प्रस्तुतिकरण

  3. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति

    1. Rajeev Ranjan Avatar
      Rajeev Ranjan

      dhanyabad Geeta jee

    2. Rajeev Ranjan Avatar
      Rajeev Ranjan

      धन्यवाद व शुभकामनाएं प्रज्ञाजी

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