हमारे दिल में रहते हैं

इरादे नेक रखते हैं
सभी को प्रेम करते हैं
वही दिल को दुःखाते हैं
जो हमारे दिल में रहते हैं

Comments

8 responses to “हमारे दिल में रहते हैं”

  1. Geeta kumari

    क्या बात है, दिल में भी रहते हैं और दिल भी दुखाते हैं
    ये तो नाइंसाफी है भई ।

    1. हाहाहा..
      यही जमाना है

  2. बहुत सुंदर लाजवाब, कवि प्रज्ञा जी द्वारा प्रेम से जुड़े कोमल यथार्य का अति सुंदर चित्रण

    1. धन्यवाद आपका

  3. अति, अतिसुंदर

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