*हमें आजकल फुर्सत नहीं है*

आजकल चाय कॉफी का है सहारा,
इसके बिना दिन कटे ना हमारा।
हमें सिर उठाने की भी फुर्सत नहीं है,
कभी कॉपी जांचो कभी प्रश्नपत्र बनाओ,
कोई छात्र विद्यालय न आए तो उसको मनाओ।
करके दूरभाष पर बात मात-पिता से,
विद्यालय आने के लिए समझाओ।
उंगलियों में कलम है हाथों में है कागज़ भी,
हाय! कविता लिखने की हम को फुर्सत नहीं है।
छात्रों की आजकल बस कॉपियां जांचते हैं,
थोड़े-थोड़े उनको नंबर भी बांटते हैं।
कितनी मिस कॉल हैं मोबाइल में देखो,
आजकल बात करने की हम को फुर्सत नहीं है।
ऑनलाइन कक्षाओं में पढ़ाते थे जब हम,
सुकून के कुछ पल तो पाते थे तब हम।
बच्चों ने सिर इस कदर है दुखाया,
कि हमें सांस लेने की भी फुर्सत नहीं है।
_____✍️गीता

Comments

4 responses to “*हमें आजकल फुर्सत नहीं है*”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर
    व्यस्त जीवन का चित्रण

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏

  2. समय बड़ा बलवान

    1. सादर आभार

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