हम बसाएंगे
अपना घरौंदा कहीं…
हम परिंदे हैं
एक जगह रुकते नहीं…
जहाँ मिलती हैं
खुशियाँ जाते हैं वहाँ
हम गमों में
घरौंदा बनाते नहीं…
चुनते हैं तिनके
घोसले के लिए..
जिंदगी भर कहीं
हम बसते नहीं…
पंख हैं, हौसला है
रुकेंगे नहीं..
भरेंगे जाकर उड़ानें कहीं…
हम परिंदे हैं
एक जगह रुकते नहीं…
हम परिंदे हैं…
Comments
15 responses to “हम परिंदे हैं…”
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Wa
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थैंक्स
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वाह
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धन्यवाद
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वाह बहुत सुंदर रचना
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🙏
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सुंदर
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🙏
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achi kavita
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🙏🙏
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👌👌
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👏👏
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उम्दा रचना
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परिंदों पर कविता लिखकर तथा जीवन की सत्यता को दिखाती हुई सुंदर रचना
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वाह वाह
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