हर्षित रहो

काम होता अवश्य मन में हर्षित रहो
सबको शीष नबा कर्म में रत रहो

आशीर्वाद से ही जीना होता आसान
बड़े सत्य वही जिन्हें छोटों का ध्यान
खेल खेल में ही अचरज संभव‌ हुए
प्रश्न थे मुश्किल जो आसानी से हल हुए

स्मरण ईश्वर का करता सब कुछ आसान
सारे गुरु में वही सब उसकी संतान
बैरी बन जाते मीत अजनबी दिखलाते पहचान
परीक्षा में वही हल का करता संधान

Comments

2 responses to “हर्षित रहो”

  1. Geeta kumari

    ईश्वर की आराधना को समर्पित बहुत सुंदर रचना

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