हर बार टूट जाते है अहसास

बेहिसाब अहसासों को हम सिमटे कैसे
कहां हो पाता है मुकम्मल मकां-ए-नज्म मिरा
हर बार टूट जाते है अहसास,
ख्वाबों के जैसे

Comments

9 responses to “हर बार टूट जाते है अहसास”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर रचना

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