बेहिसाब अहसासों को हम सिमटे कैसे
कहां हो पाता है मुकम्मल मकां-ए-नज्म मिरा
हर बार टूट जाते है अहसास,
ख्वाबों के जैसे
हर बार टूट जाते है अहसास
Comments
9 responses to “हर बार टूट जाते है अहसास”
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Nice
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Shukriya
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Good 👏👏
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thanks
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वाह बहुत सुंदर रचना
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shukriya
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Wah panna
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Good
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वाह बहुत सुंदर
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