10 Comments

  1. एक पिता की अपनी बेटी को ग़लत रास्ते पर चलने की निष्फल कोशिश करती हृदय – स्पर्शी रचना, और बाद में उसका भयानक परिणाम….. बेहतरीन प्रस्तुति

  2. सब उसको माना बेटी ने,
    ली मेरी सीख नही लेकिन..
    जो उस जल्लाद ने लौटाया,
    वो बस इक खाली खोका था..
    हाँ मैंने उसको रोका था..
    हाँ मैंने उसको रोका था.. ये पंक्तियां बहुत ही हृदय स्पर्शी लगी मुझको
    बाकी पूरी कविता बहुत ही उम्दा, बेहतरीन।
    आज की पीढ़ी को खासतौर से ,ये बात समझनी चाहिए कि माता पिता कभी भी बुरा नहीं चाहते अपने बच्चों का,

Leave a Reply