हाइकु -१

बेपरवाह है
फिरता दर दर
रमता जोगी।

चलते जाओ
यही तो है जीवन
नदिया बोली

जनता से ही
करता है सिस्टम
आंखमिचोली।

घूमो जाकर
किसी ठेठ गांव में
भारत ढूँढ़ो।

लक्ष्य है पाना
तुम एक बनाओ
दिन रात को।

कुछ कर लो
सौभाग्य से है मिला
मानव तन ।

Comments

5 responses to “हाइकु -१”

  1. ये है हाइकु विधा👌👌👌

  2. Satish Pandey

    bahut khoob

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