ना आना हाथों की लकीरों के फरेब में,
ज्योतिषी की दुकानों पर, मुकद्दर नहीं बिकता..
तदबीरों से बनाए जाते हैं मुकद्दर,
तक़दीर खुद ही आ जाए रफ्ता रफ्ता..
हाथों की लकीरें
Comments
18 responses to “हाथों की लकीरें”
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बहुत सुन्दर
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धन्यवाद जी
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बहुत खूब, बहुत सुंदर
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सादर धन्यवाद सर 🙏
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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धन्यवाद जी
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Nice
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Thanks pragya
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Very nice
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Thank you very much chandra ji
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वाह वाह, खूब
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आभार पीयूष जी 🙏
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शानदार लेखन, लाजवाब प्रतिभा। कम शब्दों में प्रभावशाली कहने की विलक्षण कला।
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आपकी सुंदर और प्रेरक समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका सतीश जी 🙏 आपकी समीक्षा से बहुत उत्साह वर्धन होता है सर ..
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सुंदर
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Thanks Allot big brother
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बहुत सुन्दर पंक्तियाँ
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Thanks Kamla ji for your pricious complement 🙏
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