हाथों की लकीरें

ना आना हाथों की लकीरों के फरेब में,
ज्योतिषी की दुकानों पर, मुकद्दर नहीं बिकता..
तदबीरों से बनाए जाते हैं मुकद्दर,
तक़दीर खुद ही आ जाए रफ्ता रफ्ता..

Comments

18 responses to “हाथों की लकीरें”

  1. बहुत सुन्दर

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद जी

  2. बहुत खूब, बहुत सुंदर

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद सर 🙏

  3. बहुत सुंदर पंक्तियां

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद जी

    1. Geeta kumari

      Thanks pragya

    1. Geeta kumari

      Thank you very much chandra ji

  4. वाह वाह, खूब

    1. Geeta kumari

      आभार पीयूष जी 🙏

  5. Satish Pandey

    शानदार लेखन, लाजवाब प्रतिभा। कम शब्दों में प्रभावशाली कहने की विलक्षण कला।

    1. Geeta kumari

      आपकी सुंदर और प्रेरक समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका सतीश जी 🙏 आपकी समीक्षा से बहुत उत्साह वर्धन होता है सर ..

    1. Geeta kumari

      Thanks Allot big brother

  6. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

    1. Geeta kumari

      Thanks Kamla ji for your pricious complement 🙏

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