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  1. यूँ तो मनुष्य किसी के मन को सब प्रकार से खुश नहीं कर सकता है, लेकिन प्रयासों के बाद भी दूसरा संतुष्ट न हो तो मन व्यथित हो जाता है, यही संवेदना प्रस्फुटित हुई, बहुत खूब

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