हिन्दी में छंद हैं , अलंकार हैं | कवियों की कल्पना हैं, लेखकों के उद्गार हैं | दोहों की छटा है , रसों की भरमार है | कल्पना और यथार्थ है , नैतिकता भी अपार है | समाज का दर्पण है , भारत का श्र्रंगार है | कौन कहता है कि हिन्दी सिर्फ भाषा है , ये तो जीता जागता संसार है |
हिन्दी तो जीता जागता संसार है
Comments
10 responses to “हिन्दी तो जीता जागता संसार है”
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सुंदर
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Thank you sir
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हिंदी के बारे में बहुत सुंदर विचार ।
हिंदी दिवस की शुभकामनाएं ।-

Thank you very much mam
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उत्तम
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Thanks
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बहुत अच्छी पंक्तियाँ लिखी हैं आपने, हिंदी दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं
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Thank you sir
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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Thank you very much mam
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