हैसियत क्या थी मेरी…

हैसियत क्या थी मेरी पूछिए मत,
बस किताब के कोरे पन्ने थे ,
लिखते रहे अपनी रूबानी,
जब बनी ना कोई गजल ना कोई नज़्म,
फटकर सिमटकर पैरों तले बस कुचले गए।

Comments

14 responses to “हैसियत क्या थी मेरी…”

  1. Vasundra singh Avatar

    बहुत खूब प्रतिमा जी

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  2. Geeta kumari

    वाह

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद जी

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar

    कम शब्दों में बहुत गहराई वाले भाव
    बहुत ही लाजवाब

    1. Pratima chaudhary

      🙏🙏

  4. Pratima chaudhary

    bahut sundar….

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद

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