होली आई है खुशियाँ लेकर

जला दो नफ़रत की होलिका
होली आई है खुशियाँ लेकर।
मिटे अहंकार की सब बोलियाँ
होली आई है खुशियाँ लेकर।।
काले गोरे का भेद मिटाकर
सबको एक रंग में रंग दे।
नशा चढ़े एक प्रेम का सबको
घोंट घोंट घोंटा भंग दे।।
जलनेवाले को जलने दे
बना विनयचंद प्रेम की टोलियाँ
होली आई खुशियाँ लेकर।।

Comments

12 responses to “होली आई है खुशियाँ लेकर”

  1. जला दो नफ़रत की होलिका
    होली आई है खुशियाँ लेकर।
    मिटे अहंकार की सब बोलियाँ
    होली आई है खुशियाँ लेकर।।
    —– बहुत ही उच्चस्तरीय भाव, बहुत सुंदर कविता।

    1. बहुत बहुत धन्यवाद पाण्डेयजी

  2. अति सुन्दर

    1. धन्यवाद श्रीमान

    1. धन्यवाद श्रीमान

  3. Geeta kumari

    जलनेवाले को जलने दे
    बना विनयचंद प्रेम की टोलियाँ
    होली आई खुशियाँ लेकर।।
    ________ होली के पावन पर्व पर कवि विनयचंद जी की, बहुत सुंदर और उच्च स्तरीय रचना ,उम्दा लेखन

    1. शुक्रिया बहिन

  4. बहुत सुन्दर रचना

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  5. जला दो नफ़रत की होलिका
    होली आई है खुशियाँ लेकर।
    मिटे अहंकार की सब बोलियाँ
    होली आई है खुशियाँ लेकर।।
    काले गोरे का भेद मिटाकर
    सबको एक रंग में रंग दे।

    _________
    होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं आपको।।

    होली पर नफरत मिटाती है और प्रेम के भाव व्यक्त करते हुए
    उच्च स्तरीय रचना।।

  6. vikash kumar

    सबको एक रंग में रंग दे।
    नशा चढ़े एक प्रेम का सबको
    घोंट घोंट घोंटा भंग दे।।

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