3 Comments

  1. क्या बात है कितने आराम से आपने कह दिया
    °°°°°°और रह गया वक्त खूंटी पर टांग कर”
    यूं लगा के जैसे आप कोई कहानी सुना रही है…
    बहुत ही रहस्यत्मक ढ़ग से आपने कविता को लिखा है।
    जिंदगी की कई सच्चाईयों को आपने अपनी कविता में जगह दी है।

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