15 अगस्त

हम स्वतंत्र होगे

एक दिन

ये आस लिए

कुछ प्रण किया था

आह!

क्या थे वो क्षण

जब मैं नहीं हम थे सब

ध्येय एक लिए हृदय में

बढ़ चले थे

ओज लिए सोज़ लिए

स्वय को अर्पित कर

कर्मपथ पर बढ़ते थे

नित्य उत्साह,उल्लास संग

भारत माता की जय

उदघोष गुंजते थे

मेहनत रंग लाई

15 अगस्त 1947

स्वप्न सत्य हुआ

उल्लास लिए हम

स्वतंत्र हुए

नयी सूबह

नयी शफ़क

मेहताब नया

उदित हुआ

तदोपरान्त

यह खास दिन

आजादी के लिए

हर वर्ष अवतरित हुआ

 

 

 

 

 

 


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

सरहद के मौसमों में जो बेरंगा हो जाता है

आजादी

मैं अमन पसंद हूँ

So jaunga khi m aik din…

5 Comments

  1. Manoj Sharma - August 5, 2016, 9:36 pm

    स्वतंत्र दिवस ककी सूबह

  2. Udit jindal - August 6, 2016, 2:44 am

    are wah bahut khhob

  3. Ritika bansal - August 6, 2016, 2:51 am

    umda lines

Leave a Reply