अ से अ: और क से ज्ञ जब लिखने लगा था मैं,
माँ को मेरी पढ़ने वाला बच्चा दिखने लगा था मैं,
फिर शब्दों को मिलाकर जब पढ़ने लगा था मैं,
माँ को मेरी अफसर दिखने लगा था मैं,
जब छोड़ कर घर को नौकरी पर जाने लगा था मैं,
माँ को मेरी उसका सहारा लगने लगा था मैं॥
राही (अंजाना)

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