गुरूर है

देर मिलता है, पर मिलता जरूर है।
किस्मत पे अपने, इतना तो गुरूर है।

खामोशी मेरी, लगने लगी कमजोरी,
रहम दिल हूं, बस इतना कुसूर है।

छत है सर, फिर भी हूं बेघर,
घर जिनके हैं, वो कितने मगरूर हैं।

हैं सब, पर कोई भी नहीं अब,
सोच है मेरी, या मेरा फितूर है।

हर हाल में, करुं ना मलाल मैं,
नफरत से तो ‘देव’ होते सभी दूर हैं।

देवेश साखरे ‘देव’

Comments

16 responses to “गुरूर है”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति

  2. Abhishek kumar

    Good

  3. Satish Pandey

    बहुत खूब

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