चलो साथी एक खेल खेलते हैं,
मोहब्बत के तार पर
जिंदगी का राग छेड़ते हैं।
एक सितार ही तो है जिंदगी,
शुरुआत करते हैं करके वंदगी,
उलझी तार तो सुलझाएंगे,
सरगम से नया सुर बनाएंगे,
पवन गगन धरा चमन
सबको प्रित रंग रंगते है।
मोहब्बत के….
कभी जो टूटा तार कोई,
देखना जोड़ें ना और कोई,
दोनों ही मिल कर उसे जोड़ेंगे,
ना टूटा फूटा जो छोड़ेंगे,
हौले हौले ही सही पर
जरा मुस्कान लेकर आगे बढ़ते हैं।
मोहब्बत……
एक खेल
Comments
17 responses to “एक खेल”
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बहुत खूब
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धन्यवाद सर
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बढ़िया
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Thank you
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वाह
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Thank you di
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Sunder rachna
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Thank you didi
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Wahh
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Thank you di
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Good
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धन्यवाद
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Good
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धन्यवाद दी
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वाह बहुत सुंदर
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धन्यवाद
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वाह वाह
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