इश्क

बच निकलते हैं इश्क के चंगुल से
जो लोग बेवफा होते हैं
गिरते वही लोग मोहब्बत में
जो इसकी गहराइयों से अनजान होते हैं
कुछ प्यार के मिलने पर आबाद होते हैं
और कुछ बिछड़ने पर बर्बाद होते हैं
दिल तोड़ देने वाले अक्सर
चैन से सोया करते हैं.

टूटी मै ऐसे कि..
फिर ना घाव मेरा कोई सिला
बिखर गई धूल की तरहा
बेकरारियाँ, बेचैनियां
और बहुत सा दर्द भी मिला
यह कह नहीं सकती कि
इश्क में मैं पूरी तरह बर्बाद हो गई
इश्क में तड़प कर तो मुझे बहुत कुछ मिला.

ढूंढती हर जगह सकून
दिल बहुत ही तड़पने लगा
फरमाया लोगों ने भटकना है बेकार
जनाब, इस मर्द की नहीं कोई दवा
एक दिन जला दिए दर्द भरे उसके खत
इश्क के धुए में ना कोई सांस ले सका
किसी एक दिलजले की वजह से
मिली पूरे जमाने को दिल लगाने की सजा.

Comments

9 responses to “इश्क”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    Nice

    1. nitu kandera

      धन्यवाद

    1. nitu kandera

      धन्यवाद

    1. nitu kandera

      धन्यवाद

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