विरान सहरा

विरान सहरा, चढ़ता सूरज,
और ये तन्हाई।
दूर तक पानी का कोई निशान,
देता नहीं दिखाई।
शायद ये आखरी सफर है, बस
हर पल तेरी याद आई।

देवेश साखरे ‘देव’

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