पुर्वी लोक गीत चले ठंडी बयरिया ये सजनी

भोजपुरी पूर्वी लोकगीत – चले ठंडी बयरिया ये सजनी |
मुखड़ा – चले ठंडी बयरिया ये सजनी ,
कांपेला बंदनवा मोर |
जल्दी से भरीला अंकवरिया
लागेला जड़वा बड़ी ज़ोर |
चले ठंडी बयरिया ये सजनी ,
कांपेला बंदनवा मोर |
अंतरा 1 – सुना मोर अँखियाँ के पुतरी ,
भईले प्यार तोहसे मोर |
बिना तोहरे तरसे नजरिया ,
उठेला कर्जवा मे हिलोर |
चले ठंडी बयरिया ये सजनी ,
कांपेला बंदनवा मोर |
अंतरा 2 -पतरी कमरिया अँखिया बाड़ी कजरी |
चले न केवनों दिलवा पर ज़ोर |
हमके बना ला सजना ये गुजरिया |
संगे बांधीला जिंगीया के डोर |
चले ठंडी बयरिया ये सजनी ,
कांपेला बंदनवा मोर |
अंतरा 3 – हरदम रहा तू हमरे अँखियाँ के पजरी |
काहे भइलू तू करेजवा के कठोर |
बोली बोले हमके गाँव नगरिया |
निरखी तोहके जइसे चितवे चकोर |
चले ठंडी बयरिया ये सजनी ,
कांपेला बंदनवा मोर |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

Comments

13 responses to “पुर्वी लोक गीत चले ठंडी बयरिया ये सजनी”

    1. Shyam Kunvar Bharti

      Thank योय4

    1. Shyam Kunvar Bharti

      Thankyou

    1. Shyam Kunvar Bharti

      Thank you

    1. Shyam Kunvar Bharti

      Thank you

  1. Shyam Kunvar Bharti

    Thank you

  2. Kanchan Dwivedi

    Very nice

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