श्याम के रंग में राधा दीवानी

प्रीत की डोरी बांधें चली आई,
तुलसी श्याम होली खेलन चली आई।
बांसुरी तुम्हारी मुझको है प्यारी,
दीवानी राधे गोपियां सारी।
बांसुरी के स्वर लहरी में छुपा लो,
गाना मुझे होठों से लगा लो।
पिया के संग बांसुरी में है रहना,
आज श्याम मोहे तुझे है रंगना।
मुझ पर चढ़ा तेरी प्रीत का जादू,
रंगों की नेह से मन बेकाबू।
तू क्या नटखट हंसी उड़ाता,
सबको तो उंगलियों पर नाचता।
कौन सा जादू जादूगर सीखा,
बरसाने तेरे रंग में भीगा।
निमिषा सिंघल

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2 responses to “श्याम के रंग में राधा दीवानी”

  1. Kanchan Dwivedi

    Wah

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