चल अब उठ भी जा ना
अभी कुछ काम नहीं फिर भी क्यों तू थकता है
मुश्किलों को देख के इतना क्यों डरता है
सिख कुछ सूरज , चाँद से
खुद वक़्त पे है आते
पुरे जहान में वक़्त पे रौशनी है फैलाते
अगर ये नहीं उठते वक़्त पे
तो कहा तू उठा करता
ना कही देख पाता सिर्फ सो जाया करता
चल अब उठ भी जा ना
सिख किसान , डॉक्टर , सैनिक से कुछ
कितनी मेहनत करता है
सब काम के बाद भी समय पे ये उठता है
मेहनत करने वाला ही चैन की नींद सोता है
अगर ये नहीं उठते वक़्त पे
तो ना कभी चैन से खाता और ना सो पाया करता
चल अब उठ भी जा ना
बुजर्गो से सीख कुछ
कितनी जल्दी उठ रहे
रिटायर्ड हो गए पर अपना काम कर रहे
जल्दी उठ कर ये पूजा पाठ कर रहे
अगर ये नहीं उठते वक़्त पे
तो तुझे कौन उठाया करता
खुद मेहनत कर तेरी चीज़े कौन लाया करता
तू जीवन के हर कदम पे सफल हो ये दुआ कौन किया करता
चल अब तो उठ जा ना
उठ भी जा ना
Comments
6 responses to “उठ भी जा ना”
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Nice
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Good
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Nice
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Nyc
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वाह
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👏👏
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