दम

जब जब ज़ुल्म कीआंधी हमारे देश में आयी।
तब तब हम प्रहरी अपने देश की लाज बचायी।।
निशाना हमारा चूक जाए ऐसा कभी हुआ नहीं।
गर निकल गयी गोली तो समझ ले तेरी खैर नही।।
आए हैं सिर पे कफन बांध कर छक्के छुड़ायेंगे हम।
हम किस मिट्टी के बने है आज तुझे बतायेंगे हम।।
डरा दे हमें किसी माई के लाल में इतना दम कहाँ।
विजयी पताका गाड़ेंगे हम शहीदों के कब्र है जहाँ।।

Comments

5 responses to “दम”

  1. Praduman Amit

    धन्यवाद।

  2. 🇮🇳🇮🇳🇮🇳👌

  3. Satish Pandey

    निशाना हमारा चूक जाए ऐसा कभी न हुआ।
    वाह वाह

  4. पुनरुक्ति अलंकार वीर रस रचना

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