सीख मोमबत्ती की

जलते ही रोशनी फैलाती है,
मोमबत्ती भी सीख दे जाती है,
हम मानस पुतलों की तरह
इक तालमेल बैठाती है
व्यक्तित्व छोटा हो या बड़ा,
महक भी चाहे हो जुदा,
लेकिन कार्य पृथक नहीं इनका,
दोनों का काम है जलना
शायद किसी दौड़ में नहीं ये शामिल,
ना चाह में,एक दूसरे को परखना
क्यों किस्मत दोनों ने एक ही पायी
नियति में लिखा इनके है जलना,
बस इसी तरह तुमको हमको,
एक सांचे में मिलकर ढलना!
सोचो भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में
कब जाने,क्या कहाँ छूट जाए ?
प्रतिस्पर्धा से अब परे हटकर
ज़रा शुरू करो मिलना जुलना
क्यूंकि ज़िन्दगी का है यही फलसफा
जब तक जीना तब तक जलना
©अनीता शर्मा
अभिव्यक़्ति बस दिल से

Comments

8 responses to “सीख मोमबत्ती की”

      1. वेलकम

  1. Satish Pandey

    बहुत खूब

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