इस काँच में कहाँ से आई दरारें?
उस रात जब जोर से आँधी आई थी
तब खिड़कियाँ आपस में गले थी।
और चीख-चीख कर
अपने मिलन की खुशी
प्रकट कर रही थी और
सावन के आगमन का
उत्सव मना रही थी।
शायद उसी रात, उसी बरसात में
इन खिड़कियों के काँच में आ गई थीं दरारें।
सावन का उत्सव
Comments
12 responses to “सावन का उत्सव”
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सुन्दर
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🙏
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वाह
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🙏
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Badiya 👍
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🙏
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👌👌
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🙏
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Good
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सुंदर
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धन्यवाद
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सुंदर प्रस्तुति
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