याद आती हैं बेटियां

छोड़ बाबुल का घर,
जब चली जाती हैं बेटियां
सभी त्यौहार लगते हैं सूने,
बहुत याद आती हैं बेटियां
दिवाली के हर दीप में,
मुस्कुराती हैं बेटियां
होली के हर रंग में,
खिलखिलाती हैं बेटियां
खुशी दमकती है चेहरों पर,
जब मिलने आती हैं बेटियां
ये दर्द और खुशी वो क्या जानें,
जिनके घरों में नहीं होती हैं बेटियां

Comments

18 responses to “याद आती हैं बेटियां”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    यथार्थ व भावपूर्ण चित्रण अतिसुंदर

    1. Geeta kumari

      आभार सहित धन्यवाद🙏

  2. Satish Pandey

    बेटियां खुशियां हैं, बेटियों की महत्ता पर प्रकाश डालती हुई सुन्दर पंक्तियाँ आपकी लेखनी की मजबूती को प्रदर्शित कर रही हैं.

    1. Geeta kumari

      आपकी सुंदर समीक्षा के लिए आभार सहित धन्यवाद 🙏

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बेटियों के प्रति प्रेम भावना एवं समाज में उनके महत्व को दिखाती हुई, बेहतरीन रचना।

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  4. Praduman Amit

    बेटी के प्रति रचना बहुत ही सुन्दर है।

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  5. Priya Choudhary

    बहुत सुंदर रचना और सुंदर भाव

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद प्रिया जी

    1. Geeta kumari

      Thank you mam 🙏

    2. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद प्रिया जी 🙏

  6. बेटियों पर उत्तम रचना

    1. Geeta kumari

      Thanks for your pricious complement

  7. Piyush Joshi

    Very nice

    1. Geeta kumari

      Thank you so much Piyush ji 🙏

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