आत्महत्या न कर

आत्महत्या न कर
जिन्दगी को बचा,
कोई दुख तेरे जीवन ज्यादा नहीं।
देख चारों तरफ
जो घटित हो रहा
ढूंढ खुशियां उसी में, दुखों को नहीं।
दुःख तो आते रहेंगे
जाते रहेंगे।
तेरा आना न होगा दुबारा यहां।
रूठ जाये भले
तुझसे संसार यह,
पर स्वयं से कभी रूठ जाना नहीं।
भोग ले सारे संसार के
सुख व दुख
पर दुखों स्वयं को डराना नहीं।
आस मत रख किसी से
जी बिंदास बन
अपने जीवन ऐसे डुबाना नहीं।
और बुझदिल न बन
कर ले संघर्ष तू
आत्महत्या से खुद को गंवाना नहीं।
—– डॉ0 सतीश पाण्डेय,

Comments

20 responses to “आत्महत्या न कर”

  1. Geeta kumari

    बहुत प्रेरणादायक👌👌

    1. Satish Pandey

      आभार

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत खूब

    1. Satish Pandey

      थैंक्स जी

  3. MS Lohaghat

    अतिसुन्दर

    1. Satish Pandey

      👏

  4. Ramesh Joshi

    खूब

    1. Satish Pandey

      👏👏

  5. मोहन सिंह मानुष Avatar

    किसी टूटे हुए इंसान में उमंग मे
    व अभिलाषा लाने वाली बेहतरीन पंक्तियां

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद ‘मानुष’ जी

  6. Priya Choudhary

    Very nice

    1. Satish Pandey

      🙏💐

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद 🙏💐

  7. Indu Pandey

    कविता से ऐसे सन्देश जरूर जारी होने चाहिए, सावन को विशेष धन्यवाद

    1. Ramesh Joshi

      सही बात है थैंक्स सावन

    2. Satish Pandey

      Thank you

    3. Satish Pandey

      धन्यवाद

  8. सही कहा आपने सीख देती हुई रचना

    1. Satish Pandey

      Thanks

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