प्रभु! जरूर मिलेंगे।

तू हड़बड़ाता क्यों है ,
और घबराता क्यों है,
तेरे दुख दर्द को ,
कोई देख रहा है,
तू अपने ज़हन में ,
झांक जरा सा ‌।

वो रमा है तेरे ही,
अंतर्मन में;
मन के पटों को खोल जरा सा ।

वो सुनता है नादानों की,
तू छल कपट से हो दूर जरा सा ।
वो भूखा तेरी श्रद्धा का,
तू पाखंडों से बच जरा सा।

वो निराकार सा ,
पूरी प्रकृति में है विद्यमान,
हृदय की गहराइयों से पुकार ,
बस दिखावे से बच जरा सा।

Comments

7 responses to “प्रभु! जरूर मिलेंगे।”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    🙏

  3. Satish Pandey

    बहुत खूब

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