वो मां ही तो है।

जब तुम उदास हो,
कोई भी ना पास हो,
तब जो सहारा देती है ,
सब दुख बाट लेती है,
वो मां ही तो है।
बिस्तर गीला किया मैंने,
वह सो गई गीले में ,
मुझे छाती पर सुलाया।
खुद भूखी रहकर,
मुझे निवाला खिलाया।
चिंता मेरी जिसे हरदम रहती है,
वो मां ही तो है।

मैं जब- जब घिरा ;मुसीबतों से ,
जमाने ने  केवल रुसवा ही किया,
मगर शीतलता जिसके आंचल में मिली ,
वो मां ही तो है।

Comments

10 responses to “वो मां ही तो है।”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    🙏

  2. Geeta kumari

    सुंदर पंक्तियां

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    धन्यवाद जी 🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      Thank you

  4. Satish Pandey

    वाह जी वाह, अत्यंत सुंदर

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद सर🙏

  5. जब तू उदास हो, भले कोई ना पास हो, जो सदैव साथ दे
    वो माँ होती है।
    आदरणीया प्रज्ञा जी की रचना की दो पंक्तियाँ आपको समर्पित करता हूँ।
    👌

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      हां सर! पढ़ा मैंने भी, बहुत अच्छा लिखा है उन्होंने, सबकुछ अलग है किंतु अंतिम दो पंक्तियां सच में मिल रही है ।शायद ये भाव स्वाभाविक है, इसलिए!

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