रक्षा बंधन

रक्षा का त्योहार है, ये बंधन नहीं है, प्यार है।

मूल्य ना आंको भेंट का, यह प्रेम का उपहार है।

दुरियां- नजदिकीयां, ये भृम का जंजाल है।

भाव बिना हैं तीर्थ क्या, प्रेम हो तो मूरत में भी भगवान हैं।

Comments

6 responses to “रक्षा बंधन”

    1. Tarun Bhatnagar Avatar
      Tarun Bhatnagar

      धन्यवाद

    1. Tarun Bhatnagar Avatar
      Tarun Bhatnagar

      हार्दिक आभार।

  1. Tarun Bhatnagar Avatar
    Tarun Bhatnagar

    हार्दिक धन्यवाद।

Leave a Reply

New Report

Close