दो डॉक्टर बर्ताव के

दो डॉक्टर बर्ताव के !
एक कड़वी दवा खिलाएं,
दूजा मीठी दवा पिलाएं,
‘मानुष’ मीठी से करें परेहज
नीम ही नीरोगी होए।

Comments

11 responses to “दो डॉक्टर बर्ताव के”

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद भाई साहब
      शायद आपको भाव समझ में आ गया होगा।
      बहुत बहुत हार्दिक आभार 🙏

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    पंक्तियों का भाव –>समाज में दो तरह का व्यवहार करने वाले मनुष्य है ,
    एक तो बिना किसी भेदभाव के सच बोलने वाले लोग होते हैं और दूसरे झूठ बोलने वाले एवं चापलूसी करने लोग होते हैं।
    आजकल सच बोलने वाले को कड़वी दवा की तरह ,कम और चिकनी चुपड़ी बातें करने वाले को मीठी दवा की तरह ज्यादा पसंद किया जाता है मगर मेरे अनुसार सच्चा इंसान नीम की तरह कड़वा मगर रोगमुक्त सा, स्वार्थमुक्त होता है।
    उम्मीद है भाव पसंद आएगा आप सभी को 🙏🙏

    1. बहुत अच्छा

      1. मोहन सिंह मानुष Avatar
        मोहन सिंह मानुष

        सादर धन्यवाद सर

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत आभार सर

  2. बहुत सुंदर भाव मोहन जी। बहुत गहराई है आपकी कविता में।

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      समीक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद मैडम जी
      आप लोगों का ही प्रेम है जो लिखने का हौसला बढ़ता है

  3. Pratima chaudhary

    सही कहा।

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत बहुत धन्यवाद

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