याद आता है गांव

याद आता है मुझको अपना गांव,
वो बड़ा सा आंगन, वो नीम की छांव।
बारिश के पानी में, चलती थी कागज़ की नाव,
ख़ूब खेलते थे, धूप हो या छांव।
जब से आई है ये बैरन जवानी,
ख़तम हो गई बचपन की कहानी।
एक – एक करके सखियां ससुराल चली,
मुझे भी जाना होगा अब पी की गली।
शहर से आया एक दिन एक कुमार,
मुझसे शादी करने को हुआ तैयार।
मां – पापा को था बस यही इंतजार,
बाबुल की गलियां छूटी, आ गई पिया के द्वार।
फ़िर भी अक्सर आता है याद गांव,
वो बड़ा सा आंगन, वो नीम की छांव।

Comments

14 responses to “याद आता है गांव”

  1. वाह, बहुत ख़ूब

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏

    1. Geeta kumari

      Thank you 🙏

  2. अतिसुन्दर

    1. Geeta kumari

      Thank you 🙏

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद जी🙏

  3. Virendra sen Avatar
    Virendra sen

    स्मरणीय रचना बहुत खूबसूरत

    1. Geeta kumari

      समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका

    1. Geeta kumari

      Thank you ☺️ mam

  4. Piyush Joshi

    वाह जी वाह

    1. Geeta kumari

      आभार पीयूष जी

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