अफ़सोस (शायरी)

मैं किसी फटी डायरी के पन्नों सा,
जो हवा में उड़ रहे है इधर- उधर,
मगर अफसोस ! पढ़ने वाला कोई नहीं।

……..मोहन सिंह मानुष

Comments

12 responses to “अफ़सोस (शायरी)”

  1. कम शब्दों में अहम बात कह दी आपने

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत आभार,🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद

  2. Geeta kumari

    मन की बात को कोई समझने वाला ना हो तो ,
    उस अनुभव को थोड़े शब्दों में कह दिया।
    सुंदर प्रस्तुति।

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद जी

  3. आपने तो गागर में सागर भर दिया है मानुष जी

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    🙏बस ऐसे ही हौसला बढ़ाते रहें यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा बहुत-बहुत धन्यवाद

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