जिंदगी है बुलबुला

जिंदगी है बुलबुला
पानी मे उठता बुलबुला
फूट जाता है अचानक
सत्य को मन मत भुला।
सोचता है आदमी
मैं सौ बरस जीवित रहूँगा,
और कैसे भी रहें,
पर मैं सदा ऐसा रहूँगा।
इस तरह माया के वश में
सच को देता है भुला
एक दिन देता है चल
छोड़ जाता है रुला।

Comments

12 responses to “जिंदगी है बुलबुला”

  1. Chandra Pandey

    बहुत खूब

  2. सुन्दर कविता

    1. सादर धन्यवाद जी

  3. जीवन का सत्य इंगित करती रचना

    1. धन्यवाद जी

    1. धन्यवाद जी

  4. Geeta kumari

    ज़िन्दगी का यथार्थ चित्रण

    1. सादर धन्यवाद

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