कुव्वत-ए-दुआ

‘निकलती है नेक मकसद को, मुकम्मल वो दुआ होती है,
नही होती दुआ अकेली कभी, साथ क़ुव्वते-दुआ होती है..’

– प्रयाग

मायने :
मुकम्मल – पूरी
क़ुव्वते दुआ – दुआ की ताकत

Comments

14 responses to “कुव्वत-ए-दुआ”

  1. Praduman Amit

    बहुत खूब।

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सुन्दर प्रस्तुति

    1. आभार आपका

  3. आपने हमें काव्य रस में सरोबार कर दिया है, वाह

    1. शुक्रिया आप भी बहुत अच्छा लिखते हैं

    1. बहुत शुक्रिया आपका

    1. आभार आपका

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