आगाह किये देता हूँ…

‘आगाह किये देता हूँ मैं ज़माने की ठोकर को,
मैं ज़मीं पे पड़ा पत्थर नही, ज़मीं में गढ़ा पत्थर हूँ..’

– प्रयाग

Comments

15 responses to “आगाह किये देता हूँ…”

  1. बहुत ही सुंदर

  2. Geeta kumari

    एकदम सही….
    पड़ा पत्थर ठोकर से, लुढ़क ही जाता है,
    गढ़ा पत्थर ठोकर से, चोट दे के जाता है।

    1. आपकी काव्य समीक्षा की क्षमता भी प्रणाम करने योग्य है, आदरणीय गीता जी

      1. 🙏🙏 सब आप कवियों की संगत का ही असर है। बहुत धन्यवाद

    2. बिल्कुल ठीक समझा आपने बहुत शुक्रिया आपका

      1. बहुत बहुत धन्यवाद सर

  3. बहुत ही सुंदर सर, वाह आनन्द आ गया

    1. Prayag Dharmani

      Thank You

    1. धन्यवाद जी

  4. Pratima chaudhary

    Very nice lines

    1. Prayag Dharmani

      🙏🙏

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