मेरे भारत के युवक जाग
आलस्य त्याग, उठ जाग जाग
तेरी मंजिल कुछ पाना है,
पाने तक चलते जाना है।
सोने को तो रात बहुत है
क्यों तू दिन में सोता है,
दिन में सब पाने को जुटते
सोकर क्यों तू खोता है।
मोबाइल से ज्ञान खोज ले
गलत राह क्यों खोज रहा
छोड़ इसे, कुछ मेहनत कर ले
इसमें आंखें क्यों फोड़ रहा।
समय पे सो जा जाग समय पर
दौड़ लगा, व्यायाम भी कर,
ठोस बना ले जिस्म स्वयं का,
सच्चाई की राह पकड़।
मेरे भारत के युवक जाग
आलस्य त्याग, उठ जाग जाग
तेरी मंजिल कुछ पाना है,
पाने तक चलते जाना है।
मेरे भारत के युवक जाग
Comments
16 responses to “मेरे भारत के युवक जाग”
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सरल शब्दो में; प्रेरणादायक एवं युवाओं को प्रोत्साहित करने वाली सुंदर पंक्तियां
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सादर धन्यवाद सर, सुन्दर समीक्षा हेतु अभिवादन
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बहुत बढ़िया
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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सादर धन्यवाद जी
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बहुत बढ़िया, प्रेरणादयक प्रस्तुति। युवाओं को जागृत करती आपकी लेखनी को सलाम।सुंदर साहित्य
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आपके द्वारा की गई बेहतरीन समीक्षा से अत्यंत हर्ष हो रहा है, बहुत सारा धन्यवाद
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सुंदर
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सादर धन्यवाद शास्त्री जी
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Sundar
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आपको हार्दिक धन्यवाद सर जी
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🙏👌✍✍✍
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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Bahut badia
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सादर धन्यवाद जी
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