11 Comments

  1. बहुत शानदार प्रज्ञा जी..गजब लिखा है बस आखिरी लाइन में आपने ‘कहानी हमारी’ वर्ड यूज़ किया है जो singular word न होकर plural word है इसलिए अगर आप पहली लाइन में ‘उल्टा मुझी पर हँसेगा’ की जगह ‘उल्टा हमीं पर हँसेगा’ लिखेंगी तो और बेहतर हो जाएगा ।

  2. ये ज़माना बड़ा ही लापरवाह-सा,
    इश्क और वफ़ा को ,
    हमेशा देर से समझता है।
    👌बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति

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