बेबसी का सैलाब कुछ ऐसा आया ,
सब रिश्तों को बहा ले गया,
तंगी कुछ ऐसी हुई कि,
हर कोई हमसे; तंग-सा हो गया,
और जनाब!कोरोना तो वैसे ही;
हैं बदनाम ;आजकल
कोरोना से बुरा तो ,
हमारा वजूद हो गया।
बेबसी का सैलाब
Comments
13 responses to “बेबसी का सैलाब”
-

क्या बात है
छा गए आप तो -

बहुत बहुत आभार 🙏
-
वाह, लाजवाब
-

बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
-
-
सुंदर
-

बहुत बहुत आभार शास्त्री जी
-
-

सुन्दर अभिव्यक्ति ।
कोरोना का कहर ही कुछ ऐसा है
जीवन ही अपना छलावा जैसा है -

बहुत बहुत धन्यवाद
-
वाह वाह, आपकी लेखनी से बहुत सुन्दर काव्य सरिता प्रवाहित हो रही है। बनी रहे,
-

बहुत बहुत आभार 🙏 सर
-

This comment is currently unavailable
-

बहुत बहुत धन्यवाद
-
-

Nice
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.