मेरा गाँव

मेरा गाँव
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गाँव मेरा, हां वही गाँव है
जहाँ सर्दी में धूप,गर्मी में शीतलता की छाँव है ।
अपनेपन का हर जङ चेतन से व्यवहार है
हर गली हर टोले में छिपा अब भी प्यार है
एक आवाज़ पे दौङ पङता है जो
बना भारत की पहचान है हा वही गाँव है ।
मगही बोली में घुली मिस्री की मिठास है
गोबर से लिपी गलयो में खुशबू का वास है
खेतों में लहराती फसल,पगडंडियो पे मखमली घास है
मन में कोई भेद नहीं,बालमन में गोकुल का रास है
हर डाली पे कोयल तीतर बटेर मैना का ठाव है
आने का संदेश देता कौवा का काव काव है ।
सुमन आर्या

Comments

10 responses to “मेरा गाँव”

    1. Suman Kumari

      सादर धन्यवाद

  1. Priya Choudhary

    बहुत सुंदर पढ़ते ही गांव की सुंदर कल्पना सामने आ जाती है👏👏

    1. Suman Kumari

      सादर आभार

  2. Geeta kumari

    बहुत सुंदर

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    गांव की प्राकृतिक सुंदरता की अति सुंदर प्रस्तुति

  4. Prayag Dharmani

    सुंदर

  5. वाह बहुत ही सुन्दर काव्यधारा प्रवाहित हो रही है, आपकी लेखनी अपने मे प्रखरता समेटे हुए है।

  6. Suman Kumari

    सादर धन्यवाद

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