हमें औरों-सा ना समझ…

हमें औरों सा ना समझ,
आंखों से और बातों से,
इरादों को भांप लेते हैं।
ये झाड़ पर चढ़ाना,
मीठी-मीठी बातें बनाना,
यहां नहीं चलेगा,
हम स्वार्थ की चाह को,
दिमाग़ से अपने; थोड़ा जांच लेते हैं।

Comments

14 responses to “हमें औरों-सा ना समझ…”

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      Thank you

  1. बहुत खूबसूरत

  2. Priya Choudhary

    Nice 👍

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  4. क्या बात है, अतिसुन्दर

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत आभार 🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद

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