जो सोया है अंधकार में…!!

जो सोया है अन्धकार में
जागेगा नवल प्रभात

उठ-उठकर देखेगा किरणें
सूर्योदय सम होगा ललाट

रजत-चाँदनी में स्वप्न को
नित पुष्पित कर देखेगा

नारी सम्मोहन छोंड़ कवि
अब प्रगतिवाद में चमकेगा

बहुत हुआ प्रज्ञा! अब जीवन
किसलय सम पुष्पित होगा

तेरे अन्तस में सुन्दरतम्
उच्छवास होगा

तेरे मन-मण्डप में दुल्हन
सरिस सजेगी कविता

पाकर तेरे भाव सौष्ठव
बन बैठेगी वनिता ||

Comments

17 responses to “जो सोया है अंधकार में…!!”

  1. Praduman Amit

    रचना तारीफ़ ए काबिल हैं।

    1. शुक्रिया आपका

  2. बहुत सुंदर रचना

    1. शुक्रिया आपका

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही लाजवाब

    1. शुक्रिया आपका
      और बहुत बहुत बधाई

    1. शुक्रिया आपका

  4. Vasundra singh Avatar
    Vasundra singh

    शब्द चयन अतुलनीय है, अलंकारो से समृद्ध है आपकी भाषा

    1. मेरी कविता का सार समझने के लिए
      शुक्रिया आपका

    1. शुक्रिया आपका

  5. This comment is currently unavailable

    1. शुक्रिया आपका

  6. बहुत बढ़िया

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