खुदकुशी मत कर मनुज

संसार मे दुख-सुख
लगे रहते हैं
मत घबरा मनुज।
जिंदगी से प्यार
खुदकुशी मत कर मनुज।
गम मिले जिस राह पर
उस राह को तू त्याग दे,
आस मत रख दूसरे से
जी स्वयं के वास्ते।
कोई दे गर ठेस तुझको
छोड़ दे उसका चमन
पर न कर तू घात अपना
ठोस कर ले अपना मन।

Comments

19 responses to “खुदकुशी मत कर मनुज”

  1. बहुत बढ़िया

    1. धन्यवाद जी

  2. Geeta kumari

    बिल्कुल सही कह रहे हैं आप,
    ” कोई दे गर ठेस तुझको छोड़ दे वो चमन”
    इन पंक्तियों को पढ़ कर किसी भी दुखी व्यक्ति को राहत मिल सकती है। कवि ने एक चिकित्सक का कार्य भी किया है।
    ऐसी लेखनी को शत – शत नमन।

    1. ऐसी सुन्दर और विद्वत समीक्षा की है आपने गीता जी, सादर नमस्कार, जो आपने इतनी सुंदर तरीके से उत्साहवर्धन किया।

      1. Geeta kumari

        बहुत बहुत स्वागत जी। 🙏आपने लिखा ही बहुत सुंदर है।

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      Thank You

  3. Indu Pandey

    Very Nice

    1. Satish Pandey

      Thanks Ji

  4. Devi Kamla

    Very nice

    1. Satish Pandey

      Thanks

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