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  1. बिल्कुल सही कह रहे हैं आप,
    ” कोई दे गर ठेस तुझको छोड़ दे वो चमन”
    इन पंक्तियों को पढ़ कर किसी भी दुखी व्यक्ति को राहत मिल सकती है। कवि ने एक चिकित्सक का कार्य भी किया है।
    ऐसी लेखनी को शत – शत नमन।

    1. ऐसी सुन्दर और विद्वत समीक्षा की है आपने गीता जी, सादर नमस्कार, जो आपने इतनी सुंदर तरीके से उत्साहवर्धन किया।

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