ताबीर

महज़ ख़्वाब देखने से उसकी ताबीर नहीं होती

ज़िन्दगी हादसों की मोहताज़ हुआ करती है ..

बहुत कुछ दे कर, एक झटके में छीन लेती है

कभी कभी बड़ी बेरहम हुआ करती है …

नहीं चलता है किसी का बस इस पर

ये सिर्फ अपनी धुन में रहा करती है ..

न इतराने देगी तुम्हें ये, अपनी शख्सियत पे

बड़े बड़ों को घुटनों पे ला खड़ा करती है ….

खुद को सिपहसलार समझ लो ,इसे जीने के खातिर

ये हर रोज़ एक नयी जंग का आगाज़ करती है ……

अर्चना की रचना “सिर्फ लफ्ज़ नहीं एहसास “

Comments

7 responses to “ताबीर”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    जितनी तारीफ की जाए उतनी कम लगें, अर्चना मैम!
    बहुत सुंदर पंक्तियां
    आपने जीवन में आने वाली सभी सकारात्मक व नकारात्मक पहलुओं का वर्णन करते हुए, जीवन को संघर्ष के साथ एक सेनानायक की तरह जीने के लिए बताया
    बहुत ही लाजवाब।👏👏👌

  2. Geeta kumari

    बहुत ही प्रेरणादायक रचना।👏

  3. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह वाह क्या बात है!!!! अतिसुंदर रचना

  4. बहुत सुंदर पंक्तियां

  5. प्रशंसनीय

  6. Rishi Kumar

    जितनी प्रशंसा करें कम है
    बहुत सुंदर रचना

  7. ज़िन्दगी हादसों की मोहताज़ हुआ करती है ..

    बहुत कुछ दे कर, एक झटके में छीन लेती है
    बहुत सुन्दर, वाह बहुत खूब

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