18 Comments

  1. पथ पर पथिक बहुत हैं पर,अपनी-अपनी मंजिल है
    कहाँ मिलता है सबको , जो जिसके काबिल है,
    आपकी कविता का भावपक्ष अत्यंत मजबूत है,
    कलापक्ष भी अपनी सुंदरता लिए हुए है, वाक्यांत और तुक का सुन्दर समन्वय है ,
    बहुत खूब

      1. तमाम पक्षो को अपनी टिप्पणी में पिङोने के, बहुत बहुत धन्यवाद ।

  2. “पथ पर पथिक बहुत हैं पर,अपनी-अपनी मंजिल है
    कहाँ मिलता है सबको , जो जिसके काबिल है
    मनचाही मंजिल का फिक्र,तू भी करती ।”
    बहुत सुंदर पंक्तियां
    जिंदगी किस मोड़ पर ले जाएं किसी को कुछ नहीं पता,
    हम क्या सोचते हैं और क्या होता है उसका कोई अनुमान नहीं होता, कभी-कभी अच्छा भी होता है और कभी बुरा भी।
    बहुत ही सुंदर भाव
    बेहतरीन प्रस्तुति

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