जीत का परचम

नारी हो निराशा नहीं,
टूटे ना तेरी आशा कहीं,।
निशा है तो नव – प्रभात भी आएगा ।
तेरी जीत का परचम लहरएगा ।
खोखले, ढकोसले, न तुझे रुलाएं,
खुदी को कर बुलंद इतना,
कि हवा भी पूछ के आए ।

Comments

18 responses to “जीत का परचम”

  1. सुन्दर प्रस्तुति

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद जी

  2. पता नहीं क्यों लोग
    इस कदर दुखी करते हैं
    खोखले ढकोसलों से
    मन को दुखी करते हैं।

    1. Geeta kumari

      जी बिल्कुल, लेकिन यदि हम अपनी बेटियों को शिक्षा के माध्यम से बुलंद बना दें तो ये सब कम हो सकता है…… समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏

  3. बहुत सच्ची पंक्तियाँ लिखी हैं आपने

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद जी 🙏

  4. अति सुन्दर

    1. Geeta kumari

      समीक्षा भी अति सुंदर लगी है बहना।

    1. बहुत शुक्रिया भाई जी 🙏

  5. नारी निराश नहीं हो सकती है। बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति, लेखनी में काफी क्षमता है आपकी। वाह

    1. Geeta kumari

      प्रेरणदायक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।🙏🙏
      यूं ही प्रेरणा देते रहें ।

  6. Isha Pandey

    Bahut hi sundar

    1. Geeta kumari

      बहुत सारा धन्यवाद है ईशा जी 💐

  7. Piyush Joshi

    वाह वाह

    1. Geeta kumari

      Thank you very much Piyush ji 🙏

  8. Indu Pandey

    नारी हो निराशा नहीं,
    very nice

    1. Geeta kumari

      आपने भाव को बहुत अच्छे से समझा है इन्दु जी समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏

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