सत्य

दुनिया के अनजाने भीड़ भाड़ में हम ऐसे अकेले आ खड़े हैं,
कोई समझे न कोई अपना अंक ये कैसी मुश्किल से जूझ रहे हैं।

दुनिया और अपनी इस जंग में यारों सत्यम की लड़ाई है,
देखा है युगों को छान कर हमें यही सब हिंसा पाई है।

सत्यम में ये सब तथा आया,
त्रेता में रावण (झूठ) को (राम) सत्य ने था मारा,
द्वापर में मार्ग प्रदर्शित करने को, कृष्णा ने सत्य की लीला रचाई थी

इस कलियुग आए बापू , जो सभी को समझें सभी को जाने
लाठी की आवाज़ के दम पर, सत्य को जीताए थे।
श्वेत रंग का चोगा ओढ़े, शांति का पाठ पढ़ाए थें।

तुम सोचो कि क्या है ख़ास,तो सुनो सबबातोंकी एक ही बात..
‘ इस दुनिया में सब कुछ नश्वर, एकसत्य ही अनश्वर है।
सत्य ही मानव धर्म है, और सत्य ही हमारा ईश्वर है।’
HEMANKUR❤️

Comments

9 responses to “सत्य”

  1. Pratima chaudhary

    सत्य के विषय में बहुत सुंदर रचना

  2. Geeta kumari

    सत्य को परिभाषित करती बहुत सुंदर रचना

  3. Satish Pandey

    सत्य की महत्ता को प्रतिपादित करती सुन्दर रचना है यह। सत्य की ही सत्ता है, सत्य ही सब कुछ है।
    इस दुनिया में सब कुछ नश्वर, एकसत्य ही अनश्वर है।
    सत्य ही मानव धर्म है, और सत्य ही हमारा ईश्वर है।’
    बहुत ही लाजबाब लिखा है आपने।

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सत्य को महत्व देती हुई, बहुत ही सुंदर रचना
    “इस दुनिया में सब कुछ नश्वर, एकसत्य ही अनश्वर है।
    सत्य ही मानव धर्म है, और सत्य ही हमारा ईश्वर है।’”
    बहुत सुंदर पंक्तियां है

  5. प्वाइंट है
    True

  6. Finding (Hemlata Soni)

    Thanq aap sbhi ko…

  7. बहुत ही अच्छे शब्दों में आपने सब कुछ कह दिया

  8. रोहित

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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